Saturday, April 11, 2020

ताकि सनद रहे .....


                         

वीर सेनानियों के उद्धरण और प्रसंगों के समय अनायास ही एक हूँक सी उठती थी, कि अब कहाँ सुभाष, आज़ाद, भगत सिंह जैसी बेबाकी ? ये बलिदानों की बेकरारी अब गुजरे ज़माने की बात हो गई है ,पर ‘नहीं’ | हमारी सेना और ‘अभिनन्दन’ जैसे वीर सिपाहियों के होते निराशा के बादल छंट जाते हैं | देश के नागरिक को हिम्मत मिलती है कि भले ही हम कितने ही विदेशी रंग में रंग जाएँ पर भारत भूमि की रगों में अब भी वही जोश वही इंकलाब की बुलंद आवाज़ गूंज रही है | यह सुखद एहसास है कि आज भारत का बच्चा - बच्चा अपने अपने तरीके से देश की सुरक्षा हेतु उन वीरों के साथ है जो जान हथेली पर लेकर घूमते हैं | ऐसे में कुछ अपने तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति में लगे हैं | अनर्गल बके जा रहे हैं | ऐसी करतूतों से वे सैनिकों का न केवल  मनोबल कम करते हैं बल्कि जनता को भी भ्रमित करते हैं | इन स्वार्थी सत्तालोलुपों को पहचानना होगा, साथ ही यह भी  याद रखना होगा कि जय-जवान और जय किसान की बदौलत ही हमारा सुख चैन बना हुआ है |


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