हम तो बदलेंगे ! हाँ भई! बदलेंगे, क्योंकि हम
सत्ताधारी हैं | आपने नाम बदला हम भी बदलेंगे | बदलने की इस राजनीति में हम और
हमारा चरित्र बदले या न बदले फिर भी बदलना बेहद जरुरी है क्योंकि इसकी आड़ में ‘बदला’
जो छुपा है | इसी विषय को बखूबी से सम्पादकीय ‘नाम परिवर्तन : बदलाव या बदला’ में
रेखांकित किया गया है | चिंतनीय ही है कि
इस बदलने की सोच के पीछे जो खर्चा होता है, वो क्या बदलने वालों की जेब से लगता है
? यह जनता की कमाई है, जो बदले की भावनाओं की बेदी पर होम हो रही है | इस प्रकार
का व्यवहार जनता के बीच मजाक का विषयभर
बनकर रह जाता है क्योंकि पब्लिक सब जानती है | गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाने
वाले शहीदों, देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वालों के नाम भी याद रहने चाहिए
न! विडम्बना ही है कि हम भूल जाते हैं कि
यह राजतंत्र नहीं प्रजातंत्र है| यदि
बदलने में समझदारी और कर्तव्यनिष्ठा है तो बदलो संकीर्ण और साम्प्रदायिक सोच को
जिसकी आग में झुलसने को बाध्य है आम आदमी | क्योंकि वह राजनीति के पैंतरे नहीं
जानता है |“लोकतंत्र की सेहत के बारे में चिंता जरुर होती है|” अत: बदलो किंतु लोकतंत्र को बीमार करने वाली सोच
को |
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
<a href="https://www.teacheron.com/tutor-profile/8YoD?r=8YoD" target="_blank" style="display: inline-block;...
-
भारतीय संस्कृति का रसपान कराने वाले ग्रन्थों में रामायण का विशेष स्थान है | रामायण के प्राण अटके हैं सीता में और सीता की अल्हड़ता,सौम्...
-
माँ ! > ओ माँ कुछ खाने को दो न | छोटू...
-
आज तो रविवार है ...हाथ में चाय का प्याला लिए रश्मि बड़े इत्मीनान से चाय पीने के मूड में थी क्योंकि दफ़्तर पहुँचने की जल्दी तो थी नहीं आ...
No comments:
Post a Comment