Saturday, April 11, 2020

जिसके रज में लोट – लोट कर बड़े हुए हैं -------







देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो नफ़रत की लाठी तोड़ो ....
हमारे दश का गौरव हमारी संस्कृति है | विविधता में एकता का यह प्रतीक ‘भारत’ विश्व के मानचित्र पर देशभक्ति, देश प्रेम के कारण ही अपना परचम लहराता है | ‘भारत माता की जय’, ‘वंदेमातरम’ तो वो बिगुल है जिसने अंग्रेजी शासन की चूलें हिलाकर रख दी थी | अपने वतन को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने के लिए  इन्हीं नारों का उद्घोष करते हुए भारत माता के सच्चे सपूतों ने अपना बलिदान दिया था | ऐ मेरे वतन आज ये कैसी कलुषित धारणा पनप रही है? जाति, धर्म, और सम्प्रदायों से कहीं ऊपर है ‘देश भक्ति’ | हर बात को राजनीति और संप्रदायिकता का जामा पहनाना उचित नहीं है| पूजा आराधना में व्रत, उपवास, रोज़ा,नमाज़ एक जरिया है वैसे ही भारत माता की जय भी देशभक्ति का माध्यम है | फिर हम भारत माता अर्थात भारत भूमि की गोद में ही तो पल रहे हैं | प्रकृति तो कभी जात – पात, धर्म, सम्प्रदाय को देख कर अपना आँचल नहीं पसारती और ना ही समेटती है फिर हम क्यों सस्ते और हलके विचारों से प्रसिद्ध होना चाहते हैं |

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