“आजकल सम्मानित लोगों का मखौल उड़ाना सामान्य सी
बात हो गई है | कभी इसे राजनैतिक टीका – टिपण्णी के लिए अंधे की लाठी कह कर
नजरअंदाज कर लिया जाता है तो कभी गरीबी और बेबसी का जामा पहनाया जाता है | आज हर
नुक्कड़ , चौराहे पर गाँधी से भीख मंगवाई जाती है | महात्मा और राष्ट्र पिता का
गौरव पाने वाले महापुरुष के प्रति हमारी यह उपेक्षा निंदनीय है | विडम्बना देखिए
छोटे बच्चे तो बच्चे बूढ़े भी गाँधी बनकर भीख मांगने को विवश है और लोगों के आकर्षण
का केंद्र बन रहे हैं | यह लाजस्पद है | आदर ना सही निरादर तो मत करो |”
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
<a href="https://www.teacheron.com/tutor-profile/8YoD?r=8YoD" target="_blank" style="display: inline-block;...
-
भारतीय संस्कृति का रसपान कराने वाले ग्रन्थों में रामायण का विशेष स्थान है | रामायण के प्राण अटके हैं सीता में और सीता की अल्हड़ता,सौम्...
-
माँ ! > ओ माँ कुछ खाने को दो न | छोटू...
-
आज तो रविवार है ...हाथ में चाय का प्याला लिए रश्मि बड़े इत्मीनान से चाय पीने के मूड में थी क्योंकि दफ़्तर पहुँचने की जल्दी तो थी नहीं आ...
No comments:
Post a Comment