शांति और सुरक्षा
ॐ शांति
शांति शांति: ....
शांति मन की
स्थिरता है | एकता,शांति और सुरक्षा समाज के विकास का मूलाधार है | शांति है तो
सुरक्षा सुनिश्चित है | इतिहास साक्षी है कि जब – जब शांति भंग हुई है समाज बिखरा है , देश समाज
सिसकियों में डूबा है | क्योकि अशांत और असुरक्षित वातावरण में खोया है माँ का
लाल, बहन का भाई , और त्रिया का सिंदूर | यह बात तो हुई युद्ध स्तर की |
वैश्वीकरण
यानि ग्लोबोलाइजेशन की बात हम करते हैं लेकिन हमारे पड़ोस में क्या हो रहा है ? कौन
दुखी है कौन असुरक्षित है यह हम नहीं जानते | और जानना भी नहीं चाहते | घरों से
आँगन गायब हो गए हैं हमारा जीवन डिब्बों जैसे घरों में सिमटता जा रहा है | हम एकाकी
हो गए हैं | मैं और मेरे की भावना ने अपनत्व को खत्म कर दिया है | मशीनीकरण के इस
दौर में हमने संबंधों की मधुरता को भुला दिया है |
ऐसे माहोल
में शांति और सुरक्षा के मायने और भी बढ़ जाते हैं | शांति और सुरक्षा का गहरा
संबंध है| जहाँ अमन और चैन है वहाँ विकास है | विकास समाज और देश की रीढ़ है| विकास
रुका तो देश टूट कर बिखर जाता है |
समाज को
विकसित करने के लिए नियम बनाए जाते हैं | छोटा सा उदाहरण लें सड़क सुरक्षा का | हम
जल्दी पहुँचने के चक्कर में अपने सफ़र को अंग्रेजी वाले सफ़र में बदल देते हैं |फिर
शांति कहाँ होगी ....| आराम और सुख का साम्राज्य फैलाने की लालसा में अशांति और
असुरक्षा का स्वागत कर रहे हैं हम , अशांति और असुरक्षा के साये में जी रहें हैं
हम | अधिक पाने की चाह में रिश्तों की मिठास और भाईचारे की भावना बलि चढ़ रही है |
इतिहास के पन्नों पर नज़र डालें तो पाएँगे कि समुद्रगुप्त के राज में सर्वत्र शांति
और सुरक्षा व्याप्त थी | यही कारण था कि कलाओं का विकास हुआ | और वह युग स्वर्ण
युग कहलाया |
भारत विश्व
का गुरु और शांति दूत रहा है | दुर्भाग्यवश हमारे देश में ही शांति का पतन हो रहा
है | चारों तरफ आतंक की कालिमा छाई हुई है | आम आदमी के मन में कहीं न कहीं भय
व्याप्त है | सीमा पर स्वयं सुरक्षाधारी सुरक्षित नहीं है | स्त्री सुरक्षा मुँह
बाएँ खड़ी है, बच्चे सुरक्षित नहीं है | अपहरण का शिकार हो रहे हैं | पर्यावरण की
बात तो का करें ?
ऐसे भयावह
निराशा के कोहरे से आच्छादित वातावरण में मलाला युसुफज़यी तथा कैलाश सत्यार्थी जैसे
आशा की किरण नजर आती है किन्तु केवल किरण से काम नहीं चलेगा हम सबको भानू बनकर चमकना होगा |
प्रेम, अहिंसा , सोहार्द की भावना ही एक रास्ता है जो इस
कसैले वातावरण को बदल सकता है| आवश्यकता है इस सोच रूपी जड़ को मानवीय मूल्यों की
झारी से भावनाओं के जल से सींचा जाए |
इन नैतिक
मूल्यों की शुरुवात होती घर से , स्कूल से | यदि हम बच्चों के मन में मनुष्यता के
गुण डालें तो नई: संदेह शांति और सुरक्षा को कायम किया जा सकता है |
ज्यादा न
सही थोड़ा प्रयास तो हम कर ही सकते हैं | आखिर उम्मीद पर दुनिया कायम है| अंततः यही
कहा जा सकता है ---
शांति ,
सुरक्षा, सोहार्द और सद्भावना के आँगन में
सुख - समृधि का विस्तार हो |
आमीन ….|
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