सूखती सम्वेदनाओं का प्रमाण है मूक जानवरों की निर्मम हत्या | लगातार यह खबररें
आ रही हैं कि कुत्तों को विष देकर मौत के घाट उतारा जा रहा है | कभी मासूम बेजबानों
को थैलों में डालकर जिंदा जला दिया जाता
है, तो कभी जहरीले इंजेक्शन देकर |
आज के यह कृत्य हमारी संस्कृति को मुँह चिढ़ा रहे हैं
क्योंकि भारत के सभी धर्मों के मूल में यह मान्यता है कि पशु-पक्षी को भोजन -पानी देना
सबसे पुण्य का काम है | निदा फ़ाजली के शब्दों में कहें तो “यह धरती सबकी है” फिर
क्यों क्रूरता अपना नाच दिखाने को आतुर हो जाती है ? यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता कि आदेश ऊपर से आए थे | कहीं से भी आए
हों यह मनुष्यता के विरुद्ध है |
ब्लूक्रॉस जैसी संस्थाएं जहाँ पशुओं के लिए मानवता की मिसाल कायम कर रही है,
वहीं अधिकारी गण अपने अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं | आखिर इनके पास अधिकार की छड़ी
जो है |
विडम्बना ही है कि एक कुत्ते की तबियत बिगड़ने पर
डॉक्टर पर केस किया जाता है और ....| शायद कुत्तों की भी किस्मत होती होगी !
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