Saturday, April 11, 2020

मैंने क्या बिगाड़ा था ?



सूखती सम्वेदनाओं का प्रमाण है मूक जानवरों की निर्मम हत्या | लगातार यह खबररें आ रही हैं कि कुत्तों को विष देकर मौत के घाट उतारा जा रहा है | कभी मासूम बेजबानों  को थैलों में डालकर जिंदा जला दिया जाता है, तो कभी जहरीले इंजेक्शन देकर |
 आज के यह  कृत्य हमारी संस्कृति को मुँह चिढ़ा रहे हैं क्योंकि भारत के सभी धर्मों के मूल में यह  मान्यता है कि पशु-पक्षी को भोजन -पानी देना सबसे पुण्य का काम है | निदा फ़ाजली के शब्दों में कहें तो “यह धरती सबकी है” फिर क्यों क्रूरता अपना नाच दिखाने को आतुर हो जाती है ? यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ा  जा सकता कि आदेश ऊपर से आए थे | कहीं से भी आए हों यह मनुष्यता के विरुद्ध है |
ब्लूक्रॉस जैसी संस्थाएं जहाँ पशुओं के लिए मानवता की मिसाल कायम कर रही है, वहीं अधिकारी गण अपने अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं | आखिर इनके पास अधिकार की छड़ी जो है |
विडम्बना ही है कि एक कुत्ते की तबियत बिगड़ने पर डॉक्टर पर केस किया जाता है और ....| शायद कुत्तों की भी किस्मत होती होगी !


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