Sunday, April 12, 2020

लो आ गई परीक्षा ......





Exam Stress/Anxiety - Anxiety UK

‘परीक्षा’ शब्द सुनते ही अच्छे अच्छों के छक्के छूटने लगते हैं | फिर भला बच्चों की क्या बिसात ? जिंदगी इम्तेहान लेती है, हर-पल हर दिन | परीक्षा चाहे कैसी भी हो मन के किसी कोने में ‘डर’ डेरा डालने लगता है | इन दिनों परीक्षा का माहोल बना हुआ है | स्कूल हो या घर , अभिभावक हों या  अध्यापक बस परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं  | किसी को परीक्षा लेनी है, तो किसी को परीक्षा दिलवानी है | और बच्चे इनकी तो दुनिया ही परीक्षा के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है | इन दिनों बच्चे पढ़ने में लगे हैं| आलम यह है कि कोई अपने नाख़ून चबाता मिल जाएगा तो कोई बाल नोचता | अरे! भई क्या हाल बना रखा है यह ? यह पूछने वाला कोई नहीं है यह तो बस सलाह, सलाह और सलाह | खेलना बंद,पार्टी बंद टी.वी बंद सब बंद सुना नहीं परीक्षा सर पर है | लगता है बच्चों से ज्यादा माता-पिता का बुरा हाल है इस परीक्षा रूपी परेशानी से | सतर्क होना अच्छी बात है पर शादी में जाना हो तो .. बच्चों की परीक्षा है | सुनो कल से मैं तो छुट्टी ले रही हूँ आखिर बच्चों की परीक्षा है भई! ऐसा अक्सर सुनने – देखने में आता है | यह अभिभावकों की चिंता और प्यार ही तो है किन्तु अनजाने में ही हम परीक्षा को भय का जामा पहना कर बच्चे के दिमाक में बैठा रहे हैं |
आखिर  क्यों यह  परीक्षा का भूत सवार है ? यह जानने की जरुरत है | यदि यह फंडा समझ में आ जाए बस परीक्षा का डर दुम दबा के भागे |
परीक्षा के दौरान बच्चे अवसाद  का शिकार हो जाते हैं, ऐसे में अभिभावक  कई प्रकार की दवाइयाँ देने लगते हैं| जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक होती हैं | इसके बजाय बच्चों की क्षमता का ध्यान रखते हुए सकारात्मक बातें की जाए,साथ ही उनका हौसला बढ़ाते रहें तो बच्चों में डर कम होगा | और इस एक्जामिनेशन फोबिया से छुटकारा भी मिलेगा |
परीक्षार्थियों को स्वयं सोचने की आवश्यकता है कि वह कैसे अपनी तैयारी करे ? परीक्षा का नाम लेते ही हलक सूखने का कारण मुख्य रूप से परीक्षा की तैयारी में कमी है  | विषय को गंभीरता से न लेना, समय नियोजन का अभाव, गैजेटस का अधिक प्रयोग, गरिष्ठ भोजन लेना,आत्मविश्वास की कमी आदि भी कई कारण हो सकते हैं |
अत: परीक्षार्थियों को चाहिए कि सभी विषयों को एक तरह से न पढ़ें, बल्कि हर विषय के लिए अलग - अलग योजना होती है उसका ध्यान रखा जाए | किसी भी कार्य की सफलता में उसकी योजना अर्थात प्लानिंग की भूमिका अहम् होती है |  निर्धारित,पाठ्यक्रम प्रश्न-पत्र पैटर्न का पूरा ज्ञान परीक्षा की  सर्वोतम स्ट्रेटेजी होती है | छात्र अपने विषय को गंभीरता तथा समझकर  पढेंगे तो प्रश्नपत्र आसानी से हल किया जा सकता है | रटकर पढ़ना स्वयं की आँखों में धूल झोंकना है क्योंकि इस तरह याद किया हुआ अधिक देर तक नहीं रहता | समझकर पढ़ना जरुरी है |पढ़ते समय मुख्यांशों, परिभाषाओं को रेखांकित करना तथा नोट्स बना लेना साथ ही ‘की वर्ड्स’ को ध्यान में रखना आवश्यक है |अत:
बच्चों को चाहिए कि ---
·         अधिक अंकों वाले चैप्टर की लिस्ट बनालें |
·         लघुतरात्मक प्रश्नों में एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर देने से सीधे स्कोरिंग होती है |
·         अनावश्यक उत्तर देने से बच्चें |
·         अंकों के आधार पर उत्तर लिखने का समय निर्धारित करें अन्यथा उत्तर आने पर भी कुछ छूट जाता है |
·         नुमेरिकल प्रश्नों के नेचर था नंबर की जानकारी होनी चाहिए |
इस तरह छोटी-छोटी बातें ध्यान में रखने से बिना किसी भय तथा परेशानी के परीक्षा दी जा सकती है | ध्यान रहे परिश्रम सफलता की कुंजी है  अत: कड़ी मेहनत करना आवश्यक है |

एक और बात ---
चूँकि परीक्षा के समय गर्मी भी दस्तक देती है और आलस आने लगता है ऐसी स्थिति में तरल पदार्थ लेने चाहिए जिसमें फलों का रस सर्वोत्तम होता है | आज की युवा पीढ़ी तनाव मुक्त रहने के लिए कोक,चिप्स जैसे फ़ास्ट फ़ूड लेती है जबकि उनकी यही पसंद उन्हें स्वस्थ नहीं रहने देती | देर तक एक ही आसन में बैठने से थकान जल्दी आती है इसलिए कुछ समय के अंतराल के बाद थोड़ा सा घूमना, पानी (फ्रिज क नहीं) पीना, मुँह धोना और एक अंगडाई लेना शरीर को तरोताज़ा करता है |
 अंतत: यही कहना उपयुक्त होगा कि विद्यार्थी को अल्पाहार, काक चेष्टा, बगुले जैसा ध्यान और स्वान जैसी निद्रा रखनी चाहिए | बिना तनाव के विषय को समझकर पढ़ने से नि:संदेह सफलता मिलेगी |




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