रीमा मैडम कॉलेज के बरामदे में बैठी कुछ सोच रही थी| नमस्ते मैडम जी | अरे
खुशी नमस्ते - नमस्ते ! आओ कहो कैसी हो ?
मैं ठीक हूँ लेकिन कुछ उलझन में भी | आप ही बताइए न! क्या लिव इन रिलेशनशिप कोई
बुरी बात है? नहीं,ख़ुशी पर प्रेम का एक ही रूप मिलेगा | फूलवारी
तो होगी पर फूल नहीं | अपने तो होंगे अपनापन नहीं | अधिकार तो होगा कर्तव्य नहीं |
यूं मान लो सब कुछ होते हुए भी सब खाली | हम आपके हैं कौन पूछने पर भी कोई जवाब
नहीं आएगा |
बताइए न! खुशी,यह तो अपना नजरिया होता है कहते-कहते अतीत के पन्ने एक –एक करके
उड़ने लगे |
फोन की घंटी ..... ट्रिन ट्रिन .... अरे देख तो रामू किसका फोन है? कहते हुए
खुद ही लपककर उठाया फोन |हैलो ओ मेरी
लाडली बेटी .... अच्छा – अच्छा !
सुनते हो अजी सुनते हो, अरे हाँ भी हाँ सुनता ही तो रहता हूँ अब बोलो भी | रीमा
आ रही है| अच्छा ! सारा घर खुशियों से भर गया | सच जब से विदेश पढ़ने गई है घर सूना हो गया
है | दादी ने माला फेरते – फेरते कहा, अब तो लड़का ढूँढना शुरू करो किशोरीलाल | हाँ-हाँ
अम्मा अब तो शहनाई बजेगी इस घर में | आखिर इकलौती बेटी है हमारी | जी भरके खुशियाँ
मनाऊंगा|
रामू जल्दी बीबीजी का कमरा ठीक करो | तुम्हें तो
पता ही है न ! उसे सब चीजें अपनी जगह चाहिए | हे भगवान ! सारा काम पड़ा है | रामू मन ही मन
कह रहा है, देखो अम्माजी को बिटिया के आने की खुसीमाँ सब कुछ खुदही बोली जात है रामू ई करलो रामू वो
करलो ओर फिर खुदही ...| माँ ने रीमा की पसंद का खाना बनाया खासकर मोतीचूर के लड्डू | रीमा आंधी की तरह आई , आते ही सारा घर सिर पर
उठा लिया | ओ दादी !मेरी अच्छी दादी | अरे बिटवा कुछ खावे हो कि नाहिं, सींक सी हुई
जा रही है | अरे दादी यह डायटिंग का जमाना है | तुम नहीं समझोगी |
ई डाटिंग-वाटिंग
का होत है ... | रीमा ! ओ रीमा जल्दी आ बेटा खाना ठंडा हो रहा है| देख तेरे लिए
मैंने क्या – क्या बनाया है कैंटीन का खाते
- खाते उकता गई होगी ना! | अरे माँ ! घर
में दावत है क्या ? और ये लड्डू .. माँ अब मेरी पसंद बदल गई है | पिज्जा-बर्गर
बनाती तो बात कुछ और थी| खैर .... | माँ की ममता का आगोश इस बदलाव से ठंडा पड़ने लगा | कुछ
कहते नहीं बना |
रीमा ! हाँ माँ, बेटी ! तेरे लिए अच्छे रिश्ते आ रहें हैं रिश्ते किसलिए ? अरे बुद्धू तेरी शादी के लिए
माँ ने चिकौटी काटते हुए कहा | रीमा सीधी होकर बैठ गई | नहीं माँ मैं शादी
में विश्वास नहीं करती | रहने दे रहने दे सब लडकियां पहले ऐसे ही कहती
हैं | नहीं माँ प्लीज ट्राई टू अंडर्सटैंड मी | तो क्या तू ... माँ का गला सूखा
जा रहा था जीभ तालू से जा टंगी कि न जाने बेटी कौन सा धमाका करने जा रही है | रीमा ने गंभीर होकर कहा ...
“ मैंने लिव इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया है | जहाँ कोई बंधन नहीं, कोई रोक टोक नहीं बस खुला आसमान मै और मेरा पार्टनर |
“ मैंने लिव इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया है | जहाँ कोई बंधन नहीं, कोई रोक टोक नहीं बस खुला आसमान मै और मेरा पार्टनर |
पार्टनर !क्या शादी एक व्यापार है? ओफ्फो ! माँ तिल का ताड़ मत बनाओ |
शादी के बंधन में रहने के बावजूद समर्पण भाव नहीं बस ढोते रहो एक दूसरे का बोझा |
ऐसा नहीं है बिटिया शादी से परिवार बनता है | परिवार समाज का आधार है | परिवार
में आत्मीयता होती है | खुशी और गम में एक दूसरे का साथ रहता है इसलिए तो खुशी दुगनी
हो जाती है और गम कम | बस – बस माँ यह
हमारा नजरिया है | आज की सोच है और फिर यह कोई अपराध तो नहीं | लेकिन रीमा ...
शादी एक बंधन है प्यार का, जिम्मेदारी का | यही तो मैं नहीं चाहती | किसी बंधन में
बंधना और हाँ मैंने रौनी के साथ रहने का फैसला कर लिया है |हमने कॉन्ट्रेक्ट पर
साइन भी कर लिए हैं | मैं कल जा रही हूँ |
क्या .... | माँ के पैरों तले ज़मीन नहीं | यह कैसी विडंबना है लिव इन रिलेशनशिप के लिए रिलेशन को लीव कर रही हैं |
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