Saturday, April 11, 2020

लिव इन रिलेशनशिप


       

                         
रीमा मैडम कॉलेज के बरामदे में बैठी कुछ सोच रही थी| नमस्ते मैडम जी | अरे खुशी नमस्ते - नमस्ते ! आओ कहो  कैसी हो ? मैं ठीक हूँ लेकिन कुछ उलझन में भी | आप ही बताइए न! क्या लिव इन रिलेशनशिप कोई बुरी बात है? नहीं,ख़ुशी पर प्रेम का एक ही रूप मिलेगा | फूलवारी तो होगी पर फूल नहीं | अपने तो होंगे अपनापन नहीं | अधिकार तो होगा कर्तव्य नहीं | यूं मान लो सब कुछ होते हुए भी सब खाली | हम आपके हैं कौन पूछने पर भी कोई जवाब नहीं आएगा |
बताइए न! खुशी,यह तो अपना नजरिया होता है कहते-कहते अतीत के पन्ने एक –एक करके उड़ने लगे |
फोन की घंटी ..... ट्रिन ट्रिन .... अरे देख तो रामू किसका फोन है? कहते हुए  खुद ही लपककर उठाया फोन  |हैलो ओ मेरी लाडली बेटी .... अच्छा – अच्छा !
सुनते हो अजी सुनते हो, अरे हाँ भी हाँ सुनता ही तो रहता हूँ अब बोलो भी | रीमा आ रही है| अच्छा ! सारा घर खुशियों से भर गया | सच जब से विदेश पढ़ने गई है घर सूना हो गया है | दादी ने माला फेरते – फेरते कहा, अब तो लड़का ढूँढना शुरू करो किशोरीलाल | हाँ-हाँ अम्मा अब तो शहनाई बजेगी इस घर में | आखिर इकलौती बेटी है हमारी | जी भरके खुशियाँ मनाऊंगा|
रामू जल्दी बीबीजी का कमरा ठीक करो | तुम्हें तो पता ही है न ! उसे सब चीजें अपनी जगह चाहिए | हे भगवान ! सारा काम पड़ा है | रामू मन ही मन कह रहा है, देखो अम्माजी को बिटिया के आने की खुसीमाँ  सब कुछ खुदही बोली जात है रामू ई करलो रामू वो करलो ओर फिर खुदही ...| माँ ने रीमा की पसंद का खाना बनाया खासकर मोतीचूर के लड्डू |  रीमा आंधी की तरह आई , आते ही सारा घर सिर पर उठा लिया | ओ दादी !मेरी अच्छी दादी | अरे बिटवा कुछ खावे हो कि नाहिं, सींक सी हुई जा रही है | अरे दादी यह डायटिंग का जमाना है | तुम नहीं समझोगी |
 ई डाटिंग-वाटिंग का होत है ... | रीमा ! ओ रीमा जल्दी आ बेटा खाना ठंडा हो रहा है| देख तेरे लिए मैंने क्या – क्या  बनाया है कैंटीन का खाते - खाते  उकता गई होगी ना! | अरे माँ ! घर में दावत है क्या ? और ये लड्डू .. माँ अब मेरी पसंद बदल गई है | पिज्जा-बर्गर बनाती तो बात कुछ और थी| खैर .... | माँ की  ममता का आगोश इस बदलाव से  ठंडा पड़ने लगा | कुछ कहते नहीं बना |
रीमा ! हाँ माँ, बेटी ! तेरे लिए अच्छे रिश्ते आ रहें हैं  रिश्ते किसलिए ? अरे बुद्धू तेरी शादी के लिए माँ ने चिकौटी काटते हुए कहा | रीमा सीधी होकर बैठ गई | नहीं माँ मैं शादी में  विश्वास नहीं करती  | रहने दे रहने दे सब लडकियां पहले ऐसे ही कहती हैं | नहीं माँ प्लीज ट्राई टू अंडर्सटैंड मी | तो क्या तू ... माँ का गला सूखा जा रहा था जीभ तालू से जा टंगी कि न जाने बेटी कौन सा धमाका करने जा रही है | रीमा ने गंभीर होकर कहा ...
 “ मैंने   लिव इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया है | जहाँ कोई बंधन नहीं, कोई रोक टोक नहीं बस खुला आसमान मै और मेरा पार्टनर |
पार्टनर !क्या शादी एक व्यापार है? ओफ्फो ! माँ तिल का ताड़ मत बनाओ | शादी के बंधन में रहने के बावजूद समर्पण भाव नहीं बस ढोते रहो एक दूसरे का बोझा |
ऐसा नहीं है बिटिया  शादी से परिवार बनता है | परिवार समाज का आधार है | परिवार में आत्मीयता होती है | खुशी और गम में एक दूसरे का साथ रहता है इसलिए तो खुशी दुगनी हो जाती है और गम कम | बस – बस माँ यह हमारा नजरिया है | आज की सोच है और फिर यह कोई अपराध तो नहीं | लेकिन रीमा ... शादी एक बंधन है प्यार का, जिम्मेदारी का | यही तो मैं नहीं चाहती | किसी बंधन में बंधना और हाँ मैंने रौनी के साथ रहने का फैसला कर लिया है |हमने कॉन्ट्रेक्ट पर साइन भी कर लिए हैं |  मैं कल जा रही हूँ | क्या .... | माँ के पैरों तले ज़मीन नहीं | यह कैसी विडंबना है लिव इन रिलेशनशिप  के लिए रिलेशन को लीव कर रही हैं |                              

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